-पुतुल
बैंगलौर के ट्रैफिक जाम में,
रोड के किनारे फटेहाल बैठा,
व्यंगमयी घूरती आँखें,
करोड़ों-अरबों फूंके जा रहे -
पटाखे, फूलझड़ियों में,
उसके हिस्से की रोटी,
दो पल की चैनभरी नींद,
मुहैया करा सकता है -
गैर जिम्मेवार मस्ती पर लगाम ,
आदमी से आदमी की हमदर्दी...........
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बैंगलौर के ट्रैफिक जाम में,
रोड के किनारे फटेहाल बैठा,
व्यंगमयी घूरती आँखें,
करोड़ों-अरबों फूंके जा रहे -
पटाखे, फूलझड़ियों में,
उसके हिस्से की रोटी,
दो पल की चैनभरी नींद,
मुहैया करा सकता है -
गैर जिम्मेवार मस्ती पर लगाम ,
आदमी से आदमी की हमदर्दी...........
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